नगर परिषद चुनाव 2025 : उम्मीदवारों में बढ़ी हलचल, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

चिखली (बुलढाणा) | 11 नवंबर 2025
नगर परिषद चुनाव 2025 के लिए बुलढाणा जिले में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। इच्छुक उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी पार्टी से टिकट पाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। पिछली नगर परिषद में भाजपा के 13, कांग्रेस के 9, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 2, शिवसेना के 1 और एक निर्दलीय पार्षद चुने गए थे।
इस बार 14 प्रभागों से कुल 28 पार्षद जनता द्वारा चुने जाएंगे, जबकि नगराध्यक्ष का चयन सीधे जनता द्वारा किया जाएगा।

पिछली परिषद में भाजपा का दबदबा
पिछले कार्यकाल में नगर परिषद पर भाजपा का नियंत्रण था। उस समय प्रिया कुणाल बोन्द्रे ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और नगराध्यक्ष बनीं। इस कदम से स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ।
कम समय के लिए ही सही, लेकिन सुहास रामकृष्ण शेटे ने भाजपा के नगराध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालते हुए नगर परिषद में भाजपा की मजबूत पैठ बनाई। शेटे के कार्यकाल में भाजपा ने करोड़ों रुपये के विकास कार्य करवाने में सफलता पाई।
लेकिन समय बीतने के साथ, शेटे का राजनीतिक प्रभाव घटता गया। पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले उन्हें हटाकर कुणाल बोन्द्रे को नगराध्यक्ष पद के लिए आगे किया और उनकी पत्नी प्रिया बोन्द्रे ने सीधे जनता से चुनाव जीत लिया।
भाजपा में मतभेद और कांग्रेस में मंथन
सुहास शेटे के नेतृत्व में भाजपा का नगर परिषद में प्रवेश, पार्टी के अंदरूनी मतभेदों की वजह बन गया।
कांग्रेस के पराजित उम्मीदवार भी हार के कारणों की समीक्षा करने में जुट गए।
भले ही भाजपा बाहरी तौर पर मजबूत दिखाई दे रही थी, लेकिन अंदरूनी असंतोष लगातार बढ़ रहा था। कांग्रेस से आए कुछ नए चेहरों के कारण पुराने कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस कर रहे थे।
प्रिया कुणाल बोन्द्रे के कार्यकाल में शेटे द्वारा मंजूर की गई कई परियोजनाएं पूर्ण हुईं, जिससे बोन्द्रे को राजनीतिक लाभ मिला। केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के कारण नगर परिषद को भरपूर निधि प्राप्त हुई और शहर में विकास कार्यों को गति मिली।
लेकिन जैसे-जैसे विकास निधि बढ़ता गया, वैसे-वैसे भाजपा के जिला स्तर पर मतभेद भी उभरने लगे। तत्कालीन जिला अध्यक्ष धृपदराव सावळे का विशेष समर्थन कुणाल बोन्द्रे को मिला, जिससे स्थानीय भाजपा विधायक महाले असहज महसूस करने लगे।
बोन्द्रे पर एकतरफा निर्णय लेने और कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप लगने लगे। भाजपा के भीतर असंतोष इस हद तक बढ़ गया कि अंततः पार्टी ने कुणाल और प्रिया बोन्द्रे — दोनों को ही पार्टी से निष्कासित कर दिया।
बोन्द्रे की “घर वापसी” और नई उलझनें
भाजपा से निष्कासन के बाद कुणाल बोन्द्रे ने फिर से कांग्रेस में वापसी की। हालांकि, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके लौटने को सहजता से स्वीकार नहीं किया।
उनका कहना था कि जब बोन्द्रे नगराध्यक्ष थे, तब उन्होंने कांग्रेस के नेताओं की उपेक्षा की थी। इसलिए, अब उनकी वापसी से संगठन में असहजता बढ़ गई।
इसी दौरान, भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद के विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें जिलाधिकारी के पास दर्ज कराईं, जिससे बोन्द्रे दंपति फिर से विवादों में आ गए।
हालांकि, इन शिकायतों पर आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
2025 का चुनाव : फिर वही चेहरों की जंग
अब एक बार फिर नगर परिषद चुनाव का समय आ गया है।
इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट पाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।
कांग्रेस की ओर से डॉ. निलेश गावंडे नगराध्यक्ष पद के लिए पूरी ताकत से तैयारी कर रहे हैं, वहीं कुणाल बोन्द्रे भी उसी पद के लिए अपनी रणनीति बना रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि बोन्द्रे के ही परिवार से उनके चाचा काशीनाथ अप्पा बोन्द्रे भी चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे हैं।
अगर इनमें से किसी को टिकट मिलता है, तो नगराध्यक्ष पद फिर से बोन्द्रे परिवार में ही जाने की संभावना बनती दिख रही है।
भाजपा में कई दावेदार
भाजपा खेमे में सुहास शेटे एक बार फिर नगराध्यक्ष पद की दौड़ में हैं।
पार्टी से निष्कासित किए गए बोन्द्रे दंपति के बाद, तत्कालीन शहराध्यक्ष पंडितराव देशमुख को यह पद पाने के प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
लेकिन, संगठन के अंदर उनके खिलाफ भी असंतोष बढ़ा।
अब भाजपा की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य विजयकुमार कोठारी की पत्नी डॉ. संध्या कोठारी ने नगराध्यक्ष पद के लिए दावेदारी प्रस्तुत की है।
वहीं, पिछली बार कांग्रेस से पराजित हुए सचिन बोन्द्रे भी भाजपा में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि इस बार भी उन्हें निराशा मिलने की संभावना है।
विजयकुमार कोठारी की सक्रियता देखकर यह माना जा रहा है कि भाजपा की टिकट इस बार डॉ. संध्या कोठारी के पक्ष में जा सकती है।
ऐसे में शेटे और देशमुख की उम्मीदें कमजोर होती दिखाई दे रही हैं।

कांग्रेस में रणनीतिक उलझन
कांग्रेस खेमे में डॉ. निलेश गावंडे को टिकट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
अगर ऐसा होता है तो कुणाल बोन्द्रे और काशीनाथ अप्पा बोन्द्रे क्या रुख अपनाएंगे — इस पर सभी की नज़रें हैं।
पार्टी के जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक राहुल बोन्द्रे के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें अपने राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल बोन्द्रे अपने निर्णय में पूरी सावधानी बरतेंगे, ताकि उनकी भविष्य की राजनीतिक स्थिति पर कोई असर न पड़े।
अब सबकी नज़र टिकट घोषणा पर
चुनाव का बिगुल बज चुका है।
कौन-कौन टिकट पाएगा और कौन बाहर रहेगा — यह कुछ ही दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
फिलहाल सभी दलों में उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चाएँ तेज़ हैं।
शहर की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर है, और जनता की निगाहें अब आने वाले दिनों की राजनीतिक तस्वीर पर टिकी हैं।
– वृत्तनायक संवाददाता, चिखली (बुलढाणा)



